India Vs China: भारत के सोलर टैरिफ से बढ़ी चीन की बेचैनी, WTO पहुंचा ड्रैगन
नई दिल्ली: भारत द्वारा चीन से आयात होने वाले सोलर सेल और मॉड्यूल पर लगाए गए कड़े शुल्कों ने बीजिंग की चिंता बढ़ा दी है। चीन ने भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शिकायत दर्ज कराते हुए अब इस मामले में पैनल गठित करने की मांग कर दी है।
भारत सरकार ने घरेलू सौर उद्योग को बढ़ावा देने और चीन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सोलर सेल और मॉड्यूल पर भारी बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) लागू की हुई है। चीन का आरोप है कि भारत के ये कदम WTO के नियमों का उल्लंघन करते हैं और चीनी कंपनियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
भारत के फैसले से क्यों परेशान है चीन?
भारत ने चीन से आयातित सोलर सेल पर 25% और सोलर मॉड्यूल पर 40% बेसिक कस्टम ड्यूटी लागू कर रखी है। यह नीति 1 अप्रैल 2022 से लागू है और 2026 में भी जारी है।
भारत का उद्देश्य घरेलू कंपनियों को बढ़ावा देना, स्थानीय उत्पादन बढ़ाना और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। लेकिन चीन को इससे बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है क्योंकि वह दुनिया में सोलर उपकरणों का सबसे बड़ा निर्यातक है।
WTO में पहुंचा मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने दिसंबर 2025 में भारत के खिलाफ WTO में विवाद दर्ज कराया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच 10 फरवरी 2026 को परामर्श भी हुआ, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।
अब चीन ने WTO से इस मामले में एक विवाद निपटान पैनल गठित करने की मांग की है। चीन का कहना है कि भारत की नीतियां वैश्विक व्यापार नियमों के खिलाफ हैं।
चीन का भारत पर आरोप
चीन का आरोप है कि भारत:
- आयातित सोलर उत्पादों पर अत्यधिक शुल्क लगा रहा है
- घरेलू उत्पादों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है
- विदेशी कंपनियों के लिए बाजार मुश्किल बना रहा है
चीन का दावा है कि भारत की ये नीतियां WTO के कई समझौतों का उल्लंघन करती हैं, जिनमें शामिल हैं:
- GATT 1994
- सब्सिडी एवं प्रतिपूरक उपाय समझौता
- व्यापार-संबंधित निवेश उपाय समझौता
सोलर सेक्टर में चीन का दबदबा
सोलर उद्योग में चीन का वर्चस्व बेहद मजबूत है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार:
- दुनिया के 92% से अधिक PV सेल का उत्पादन चीन में हुआ
- 86% से अधिक सोलर मॉड्यूल चीन ने बनाए
- वैश्विक सप्लाई चेन के लगभग 80% हिस्से पर चीन का नियंत्रण है
ऐसे में भारत की टैरिफ नीति चीन के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।
भारत क्यों अपना रहा सख्त रुख?
भारत तेजी से बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना चाहता है। सरकार का मानना है कि यदि सोलर सेक्टर में चीन पर निर्भरता कम नहीं की गई तो भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से केंद्र सरकार लगातार “मेक In India” और “आत्मनिर्भर भारत” के तहत स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहन दे रही है।
भारत-चीन व्यापार संबंध
चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 में:
- भारत का चीन को निर्यात बढ़कर 19.47 अरब डॉलर पहुंचा
- चीन से आयात 131.63 अरब डॉलर रहा
- व्यापार घाटा बढ़कर 112.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया
आगे क्या होगा?
अब WTO के विवाद निपटान तंत्र के तहत पैनल गठित होने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। यदि मामला लंबा खिंचता है तो इसका असर भारत-चीन व्यापार संबंधों और वैश्विक सोलर बाजार पर भी पड़ सकता है।
भारत फिलहाल घरेलू उद्योग को मजबूत करने के अपने फैसले पर कायम नजर आ रहा है, जबकि चीन इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के खिलाफ बता रहा है।

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