🇮🇳 स्वदेशी डिफेंस इनोवेशन में बड़ी उपलब्धि
भारत ने लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) का सफल परीक्षण किया
नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाते हुए ओडिशा तट पर लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल (LR-AShM) का सफल परीक्षण किया है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) द्वारा विकसित इस अत्याधुनिक मिसाइल ने लगभग 1500 किलोमीटर की दूरी पर समुद्र में मौजूद अपने लक्ष्य को बेहद सटीकता के साथ भेदा। इस सफलता को भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
यह मिसाइल हाइपरसोनिक श्रेणी में आती है और इसे Mach 5 से अधिक गति वाले लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी अधिकतम गति Mach 10 तक बताई जा रही है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज और घातक एंटी-शिप मिसाइलों में शामिल करती है।
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🔴 DRDO ने नहीं जारी किया आधिकारिक बयान, BJP ने शेयर किया वीडियो
इस परीक्षण के बाद अभी तक DRDO की ओर से कोई आधिकारिक बयान या वीडियो जारी नहीं किया गया है। हालांकि, Bharatiya Janata Party (BJP) ने अपने आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर इस परीक्षण से जुड़ा एक वीडियो साझा किया है। पोस्ट में दावा किया गया है कि भारत की हाइपरसोनिक क्षमता अब और भी मजबूत हो गई है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस परीक्षण में मिसाइल के एडवांस्ड टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम, हाई-स्पीड मैन्युवरिंग और उड़ान के दौरान किए गए जटिल दांव-पेच (mid-course maneuvers) का सफल प्रदर्शन हुआ। मिसाइल ने लॉन्च से लेकर लक्ष्य पर प्रहार तक मिशन के सभी मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
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⚙️ LR-AShM मिसाइल की प्रमुख खासियतें
- स्वदेशी हाइपरसोनिक ग्लाइड हथियार: LR-AShM एक दो-चरणीय (two-stage) सॉलिड-प्रोपेल हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जिसे विशेष रूप से भारतीय नौसेना के लिए विकसित किया गया है।
- A2/AD क्षमता में इजाफा: यह मिसाइल हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की एंटी-एक्सेस/एरिया-डिनायल (A2/AD) क्षमताओं को काफी मजबूत करती है।
- अत्यधिक गति और चपलता: मिसाइल Mach 10 तक की गति हासिल कर सकती है और उड़ान के दौरान औसतन Mach 5 की स्पीड बनाए रखती है।
- रडार से बचने की क्षमता: यह कम ऊंचाई पर अर्ध-बैलिस्टिक (quasi-ballistic) मार्ग अपनाते हुए कई बार “स्किप” करती है, जिससे यह रडार की पकड़ से बचती है।
- सटीक टारगेटिंग सिस्टम: अंतिम चरण (terminal phase) में यह स्वदेशी सेंसर और एडवांस्ड गाइडेंस सिस्टम का उपयोग कर स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।
- स्वदेशी विकास: इस प्रणाली को DRDO की एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी (ASL) और विभिन्न औद्योगिक साझेदारों के सहयोग से विकसित किया गया है।
🇮🇳 आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी छलांग
ओडिशा तट पर किया गया LR-AShM Phase-II परीक्षण भारत के रक्षा क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूती देती है और दिखाती है कि भारत अत्याधुनिक हाइपरसोनिक तकनीकों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की मिसाइलें भविष्य के युद्धों में गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं, खासकर समुद्री सुरक्षा और सामरिक संतुलन बनाए रखने में।
